Vishal Kumar
Director, The Choreographer
Director, The Choreographer
Vishal Kumar
आदरणीय अभिभावक गण एवं प्यारे बच्चों
यह बात सत्य है आज से कुछ वर्ष पूर्व तक नृत्य/ कला विधा को हीन दृष्टि से देखा जाता था । संभ्रांत घर के लड़के या लड़कियां इस विद्या में रुचि रहने के बावजूद भी समाज या परिवार के भय के कारण अपनी प्रतिभा का दमन कर दूसरा कोई काम करने के लिए मजबूर हो जाते थे । लेकिन अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कला की महत्ता को देखते हुए इसे महत्वपूर्ण माना गया है और यही कारण है कि तमाम सरकारी तथा गैर सरकारी विद्यालयों में कला शिक्षक की बहाली की जा रही है। कला की महत्ता पर विशेष बल दिया जा रहा है । इसलिए मैं आप सभी छात्र छात्राओं तथा अभिभावकों से अपील करता हूं कि आप अपने तथा अपने बच्चों अंदर के प्रतिभा को पहचाने और उसे निखारने के लिए हमारी संस्था के सदस्य बनें।
सुरांगन की स्थापना 1959 में भारत के ख्याति प्राप्त नृत्यकार श्री विश्वबंधु जी के द्वारा की गई थी जिसका उद्देश्य नृत्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार करना है ।
संस्था कला संस्कृति एवं युवा विभाग बिहार सरकार संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार, ICCR विदेश मंत्रालय भारत सरकार से संबद्ध है जिसे अब तक देश-विदेश में लगभग 6000 से अधिक मंच प्रदर्शन का गौरव प्राप्त है ।
गुरु विश्वबंधु जी के मार्गदर्शन में सैकड़ों कलाकार नृत्य साधना में सफलता प्राप्त कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं तथा कला जगत में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते है। सुरांगन संस्था अपनी एक विशिष्ट नृत्य शैली ( उदयशंकर स्टाइल )के कारण जानी जाती है। अपनी इस अनूठी नृत्य शैली को और भी विकसित करने के दृष्टिकोण से विश्व बंधु जी के परम शिष्य जितेंद्र कुमार (राष्ट्रीय सम्मान व ख्याति प्राप्त नृत्य कार) जो कि पद्म विभूषण आमला शंकर एवं पद्मश्री ममता शंकर के शिष्य है, उन्होंने The Choreographer की स्थापना की है जो सुरांगन का ही एक प्रशिक्षण संस्थान है।
इस संस्थान में मुख्य रूप से Creative Dance, Folk Dance, Indian Contemporary Dance, Theatrical Dance , Bollywood Dance का प्रशिक्षण दिया जाता है।
इस संस्थान में प्रशिक्षण प्राप्त करने के फायदे:-
*एक वर्ष के प्रशिक्षण के उपरांत आगे नृत्य की शिक्षा जारी रखने के लिए सुरांगन संस्था द्वारा प्रतिमाह ₹1000 से ₹10000 तक की छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाती है।
*कोर्स पूरा करने पर प्राइवेट या सरकारी विद्यालय में नौकरी आसानी से मिल सकती है ।
*राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मंच पर प्रदर्शन के अवसर प्राप्त हो सकते हैं ।
*देश के ख्याति प्राप्त गुरु से प्रशिक्षण का अवसर प्राप्त हो सकता है ।
*इस शैली में डिग्री या डिप्लोमा के लिए प्राचीन कला केंद्र चंडीगढ़ से परीक्षा भी दिलवाई जाती है।