Bihar Gaurav Gaan
Bihar Gaurav Gaan
Bihar Gaurav Gaan
- बिहार गौरव गान: माटी की महक, संस्कृति की गूंज
- “दिशा-दिशा में लोक रंग का तार-तार है,
- महका-महका सोंधी माटी का बिहार है।”
‘बिहार गौरव गान’ बिहार की सांस्कृतिक पहचान को स्वर और शब्दों में पिरोने वाला एक प्रेरणादायक गीत है, जिसकी रचना सुप्रसिद्ध लेखिका श्रीमती शांति जैन ने की है तथा इसका संगीत संयोजन प्रख्यात संगीतकार श्री सीताराम सिंह द्वारा किया गया है।
वर्ष 1997 में बिहार युवा महोत्सव के अवसर पर इस गीत का प्रथम मंचन बिहार के मूर्धन्य नृत्याचार्य श्री विश्वबंधु जी के निर्देशन में हुआ। इस भव्य प्रस्तुति में 65 कलाकारों ने भाग लिया और गीत को रंगमंच पर अत्यंत कलात्मकता एवं गरिमा के साथ प्रस्तुत किया। कार्यक्रम को तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री लालू प्रसाद यादव ने विशेष रूप से सराहा और इसकी सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन हेतु प्रेरित किया। यह प्रस्तुति बिहार की इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और लोक अस्मिता का एक सजीव प्रतिबिंब बन गई।
वर्ष 2006 में इस गीत का पुनः संशोधन एवं नव-निर्माण किया गया। इस संस्करण का निर्देशन तनवीर अख्तर, सुमन कुमार, सोमा चक्रवर्ती, विजय प्रकाश मिश्रा तथा जितेंद्र कुमार जैसे प्रतिभाशाली कलाकारों ने किया। हालांकि, इसके मंचन में श्री विश्वबंधु जी की मूल निर्देशकीय छवि स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती रही। इस प्रस्तुति ने मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार को अत्यंत प्रभावित किया, और तभी से यह गीत “बिहार की सांस्कृतिक पहचान” के रूप में प्रतिष्ठित हो गया। आज बिहार का कोई भी महत्वपूर्ण आयोजन ‘बिहार गौरव गान’ के बिना अधूरा प्रतीत होता है।
इस गीत की प्रस्तुति पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणव मुखर्जी, डॉ. प्रतिभा देवीसिंह पाटिल, श्री रामनाथ कोविंद तथा मॉरीशस के प्रधानमंत्री श्री नवीन चंद्र रामगुलाम के सम्मान में भी की जा चुकी है। श्री रामगुलाम को यह प्रस्तुति इतनी प्रिय लगी कि उन्होंने 2008 में मॉरीशस के स्वतंत्रता दिवस समारोह में इसकी विशेष प्रस्तुति आयोजित करवाई।
अब तक ‘बिहार गौरव गान’ की 2000 से अधिक प्रस्तुतियाँ बिहार एवं भारतवर्ष के विभिन्न हिस्सों में सफलतापूर्वक हो चुकी हैं, और यह गीत आज भी बिहार की सांस्कृतिक गरिमा और गौरव का प्रतीक बना हुआ है।
अब तक ‘बिहार गौरव गान’ की 2000 से अधिक प्रस्तुतियाँ बिहार एवं भारतवर्ष के विभिन्न हिस्सों में सफलतापूर्वक हो चुकी हैं, और यह गीत आज भी बिहार की सांस्कृतिक गरिमा और गौरव का प्रतीक बना हुआ है।
Performance Info
Glimpses Of Bihar
Writer :
Padmashree Dr Shanti Jain
Music :
Sitaram Singh
Director :
Jeetendra Kumar