Batohiya
Batohiya
Batohiya
- नाटक ‘बटोहिया भिखारी ठाकुर की अमर कृति ‘बिदेसिया से प्रेरित एक नवीन नाट्य प्रयोग है। यह नाटक आज के सामाजिक तथा पारिवारिक परिवेश में पनप रही मानसिक दूरियों के बीच एक सेतु बनाने वाला नाटक है। इसकी पृष्ठभूमि बिहार के होने के साथ-साथ सार्वभौमिक भी है। एक सामाजिक व्यक्तित्व की कहानी है- ‘बटोहिया’ जो सहृदय हैं, दयालु है, सभी लोगों के दुख सुख का साथी है।
- गोपी जो कि गांव का एक साधारण सा गवैया कलाकार है, मंदिर में भजन कीर्तन करके किसी तरह अपना भरण-पोषण कर लेता है। गोपी की शादी एक खूबसूरत लड़की झुलनी से होती है। झुलनी को गोपी की गरीबी और उसका गाना बजाना पसंद नहीं है। वह चाहती है कि उसका पति कोई भी काम धाम कर के अच्छे पैसे कमाए। गोपी अपने गांव में गा-बजाकर संतुष्ट है लेकिन झुलनी उसे पैसा कमाने के लिए गांव छोड़ने पर मजबूर कर देती है।
- गोपी गांव छोड़कर मुंबई चला आता है मुंबई में उसकी मुलाकात मशहूर अदाकारा सितारा बेगम से होती है। सितारा बेगम को अपनी रामलीला कंपनी के लिए राम की तलाश है। सितारा गोपी की कला से प्रभावित होकर न केवल उसे राम की भूमिका देती है बल्कि मन ही मन अपना दिल भी दे बैठती है।
- कई महीने बीत जाने के उपरांत भी गोपी झुलनी की कोई सुध नहीं लेता है। गांव में झुलनी का रो रो कर बुरा हाल हो गया है।
- जैसे ही इस बात का पता बटोही को चलता है, बटोही झुलनी को लेकर गोपी से मिलवाने मुंबई चले आते हैं और गोपी को पति पत्नी के संबंध का महत्व बताकर वापस लाते हैं।
- कहानी के अंत में यही संदेश है कि हमारे आसपास एक बटोही की आवश्यकता है जो समाज में टूटते बिखरते रिश्तो को जोड़ने में एक कड़ी का काम करें यह बटोही कोई भी हो सकता है-दोस्त, परिवार तथा आप…
Performance Info
Inspired by Bhikhari Thakur’s Bideshiya
Writer :
Vivek Kumar
Music & Direction :
Md. Jani
Concept & Choreography:
Jeetendra Kumar