Barahmaasa
Barahmaasa
Barahmaasa
- बिहार एक ऐसा राज्य है जहाँ विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोग आपसी सौहार्द से रहते हैं। यह राज्य अंग, मगध, भोजपुर, मिथिलांचल और वज्जिकांचल – पाँच भागों में विभाजित है। भाषाई विविधता के बावजूद सभी क्षेत्रों की संस्कृति और परंपराएँ एक जैसी हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष में बारह महीने होते हैं – चैत्र से फाल्गुन तक। प्रत्येक महीने में कोई न कोई पर्व या सांस्कृतिक परंपरा निभाई जाती है। इन्हीं पर्वों को एक सूत्र में बाँधता है – बारहमासा।
चैत्र – नववर्ष का पहला महीना, श्रीराम जन्म और चैता गायन का समय।
वैशाख – शुभ कार्यों के लिए उत्तम, विशेषकर विवाहों के लिए।
ज्येष्ठ – वट सावित्री व्रत, पति की दीर्घायु के लिए व्रत और पूजा।
आषाढ़-श्रावण – वर्षा ऋतु में कजरी गायन और झूले की परंपरा।
भाद्रपद – श्रीकृष्ण जन्म, सोहर गीतों के माध्यम से उत्सव।
आश्विन – मां दुर्गा की आराधना और मगध में देवास की परंपरा।
कार्तिक – सबसे पावन महीना, गंगा स्नान और छठ पर्व का आयोजन।
अगहन – धान की कटाई, कटनी नृत्य और कृषि उत्सव।
पौष-माघ – श्रीराम-सीता विवाह और समदाउन गीत।
फाल्गुन – रंगों का उत्सव होली, नगरवासियों संग प्रभु राम का होली खेलना।
Performance Info
Festivals Of Bihar
Writer :
Padmashree Dr Shanti Jain
Music :
Sitaram Singh
Director :
Jeetendra Kumar