Shanti ki Chah Buddha ki Raah
Shanti ki Chah Buddha ki Raah
Shanti ki Chah Buddha ki Raah
‘शांति की चाह, बुद्ध की राह’ एक समसामयिक नृत्य-नाटिका है, जो आज की मानव सभ्यता में व्याप्त काम, क्रोध, लोभ, मोह, तृष्णा और अहंकार जैसे अवगुणों के कारण उत्पन्न अशांति को उजागर करती है। लगातार बढ़ रहे अपराध, शोषण और हिंसा से त्रस्त आम जन शांति की खोज में भटक रहा है।
कहानी एक पथिक से शुरू होती है, जो समाज की बुराइयों से भागता हुआ एक सच्चे इंसान की तलाश में है। उसे मार्ग में काम, क्रोध, घृणा और लोभ जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से ग्रस्त व्यक्ति मिलते हैं, जो अपने आचरण से मानवता को शर्मसार करते हैं।
हताश और व्यथित पथिक अंततः बुद्ध के सिद्धांत—सत्य, करुणा और अहिंसा—के मार्ग पर चलकर शांति का अनुभव करता है।
नाटिका का सार है:
“अमन की प्यासी धरती को दो बुद्धदेव का अमर प्याम,
सत्य-अहिंसा के साए में पाएगी दुनिया आराम।”
Performance Info
Based On Mahatma Buddha’s Thoughts
Concept:
Bishwabandhu
Music & Direction :
Raju Mishra
Choreography & Direction:
Jeetendra Kumar