Operation Cactus Lily
Operation Cactus Lily
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1971 में भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन कैक्टस लिली’ ने विश्व मानचित्र पर बांग्लादेश का अलग अस्तित्व स्थापित किया। निस्संदेह, इस ऑपरेशन में बांग्लादेशी मुक्ति वाहिनी का अमूल्य योगदान था, लेकिन भारतीय सेना, जनरल सैम मानिक शॉ और तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के योगदान को कम करके नहीं आंका जा सकता। बांग्लादेशी लोगों ने दो दशक से अधिक समय तक पाकिस्तानी सैनिकों के उत्पीड़न को झेला था। बांग्लादेशी नागरिकों ने अत्याचारी, बलात्कारी पाकिस्तानी सेना से मुक्ति पाने के लिए ही ‘मुक्ति वाहिनी’ का गठन किया था। इस लड़ाई में मुक्ति वाहिनी को भारत का पूरा समर्थन मिला। केवल सात दिनों तक चली लड़ाई ने पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया। पूर्वी सेना और पाकिस्तानी सेना के प्रमुख ए. के. नियाज़ी ने 16 दिसंबर 1971 को भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इस दिन को भारतीय सेना के इतिहास में स्वर्णिम विजय दिवस के रूप में याद किया जाता है। युद्ध में बिहार और झारखंड के सैनिकों के विशेष योगदान को देखते हुए दोनों राज्यों के महामहिम राज्यपाल को आमंत्रित किया गया था। इस अवसर पर गुलमोहर मैत्री की ब्रांड एंबेसडर श्रेयसी सिंह की उपस्थिति भी विशेष थी। इस आयोजन का विजन बहुत स्पष्ट था। युद्ध में जाने वाला हर सैनिक सिर पर कफन बांधकर चलता है, इसमें कोई संदेह नहीं कि वे बहादुर हैं लेकिन क्या वह महिला (माँ, बहन, बेटी, पत्नी) जिसने उन्हें युद्ध में भेजा, किसी से कम वीर है? और 1971 की महिलाएं और भी अधिक वीर रही होंगी, क्योंकि तब उनकी पुरुषों पर निर्भरता आज की तुलना में अधिक थी। उन वीर नारियों के सम्मान में ऐसा आयोजन उनके जख्मों पर मरहम का काम करता होगा।
Performance Info
Based On 1971 Indo-Pak War
Design:
Abhishek Chauhan
Music & Direction :
Md. Jani
Concept, Choreography & Direction:
Jeetendra Kumar