Jhijhiya
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झिझिया एक देवी-उपासना आधारित लोकनृत्य है, जिसमें महिलाएं और किशोरियाँ मिट्टी के घड़े (जिसमें छोटे-छोटे छेद होते हैं) में दीपक जलाकर सिर पर रखती हैं और समूह में नृत्य करती हैं। यह नृत्य रात्रिकालीन होता है और विशेष रूप से माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है।
घड़े के भीतर की लौ देवी की शक्ति का प्रतीक होती है, और उसके प्रकाश को बचाए रखते हुए नृत्य करना साधना का रूप माना जाता है। इस दौरान नर्तकियाँ झिझिया गीत गाती हैं, जो देवी की स्तुति, लोककथाओं और सामाजिक संदेशों से ओतप्रोत होते हैं।
किंवदंती के अनुसार, जब किसी गांव में महामारी या संकट आता था, तो महिलाएं देवी से रक्षा की प्रार्थना करती थीं और झिझिया नृत्य करती थीं। यह नृत्य न केवल धार्मिक विश्वास है, बल्कि सामुदायिक एकता और स्त्री शक्ति का प्रतीक भी है।
मुख्य विशेषताएँ:
सिर पर छिद्रयुक्त घड़ा जिसमें जलता दीपक
समूहिक घेराव में नृत्य और गीत
देवी दुर्गा की आराधना और जनकल्याण की कामना
अंधकार में प्रकाश के प्रतीक के रूप में प्रदर्शन
Performance Info
Folk Dance Of Bihar
Writer :
Kunal
Music :
Raju Mishra
Choreography & Direction:
Jeetendra Kumar