Jat-Jatin

Jat-Jatin

Jat-Jatin

  1. जट-जटिन, मैथिल लोक-जीवन में सन्निहित उद्देश्यपरक मनोरंजन का विलक्षण उदाहरण है। पारंपरिक रूप से, इसका आयोजन, सावन भादो के शुक्ल पक्ष की रात को किया जाता है। आयोजन का उद्देश्य होता है वृष्टि-देव, इन्द्र को प्रसन्न करना। ताकि समुचित वारिस हो, कृषि कार्य सफल हो, भरपूर अन्न उपजे तो जन-जीवन खुशहाल हो।
  2. मिथिला के लोक-नाट्य, कल्पना प्रधान होकर भी आध्यात्मिक तथा सामाजिक सरोकारों से संपृक्त होती है। फलतः मनोरंजन के साथ-साथ, जीवन के रहस्यों एवं विलासिता के अमूर्त एवं प्रगाढ़ सत्वों का भी दिग्दर्शन कराता है।
  3. जट-जटिन स्त्रियों की अपनी कला हैं। यहाँ नाट्य में वर्णित सारे पात्रों का अभिनय स्त्रियों के द्वारा ही किया जाता है तथा प्रेक्षक भी स्त्रियाँ ही होती हैं।
  4. नाट्य में एक तरफ दांपत्य जीवन के मार्मिक पक्षों की प्रस्तुति है तो दूसरी तरफ दार्शनिक तथ्य भी सन्निहित हैं जिसका संबंध मूलतः तंत्र से है। अभिनय को अधिक उल्लासपूर्ण बनाने के लिए कतिपय स्थानीय प्रसंगों का स्वतः स्फूर्त समावेश कर लिया जाता हैं फलतः प्रदर्शन और अधिक उन्मुक्त तथा आह्लादकारी होता है।
  5. पारंपरिक रूप से जट-जटिन का प्रदर्शन बिना किसी वाद्य यंत्र के ही किया जाता है। फिर भी संवाद, गीतों के माध्यम से व्यक्त होते हैं और यह अभिव्यक्ति नृत्य के आंगिक भंगिमाओं के साथ ही की जाती हैं।
  6. बदलते समय के साथ, आज यह लोक-नाट्य लुप्तप्राय ही है। यही कारण है कि हमने इसे वृत्त नृत्य-नाट्य के रूप में प्रस्तृत करने का प्रयास किया है!

Performance Info

Folk Dance Of Bihar

Writer :

Kunal

Music :

Raju Mishra

Choreographer:

Jeetendra Kumar